राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में किसानों को देश की रीढ़ बताते हुए कहा कि उनके अथक परिश्रम से ही भारत खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना है। उन्होंने कहा कि आज भारत कृषि उत्पादों का निर्यात करने में सक्षम है, जो किसानों की मेहनत का प्रतिफल है।
राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना, रियायती ब्याज दर पर ऋण, प्रभावी फसल बीमा, गुणवत्तापूर्ण बीज, पर्याप्त सिंचाई सुविधाएं और उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने और जैविक खेती को बढ़ावा देने को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ के माध्यम से अन्नदाताओं के योगदान का सम्मान और उनके प्रयासों को मजबूती दी जा रही है।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने समावेशी विकास पर बल देते हुए आदिवासी, गरीब और वंचित वर्गों के कल्याण को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
जनजातीय समाज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर पांचवां ‘जनजातीय गौरव दिवस’ उत्साहपूर्वक मनाया गया। उन्होंने ‘आदि कर्मयोगी’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे जनजातीय युवाओं में नेतृत्व क्षमता का विकास हुआ है। स्वास्थ्य क्षेत्र में उपलब्धियों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि ‘राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन’ के तहत अब तक छह करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।
राष्ट्रपति ने कहा कि एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में लगभग 1.40 लाख विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास के संरक्षण के लिए संग्रहालयों का निर्माण किया जा रहा है, जबकि ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ और ‘पीएम-जनमन योजना’ के माध्यम से जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण को सुनिश्चित किया जा रहा है।
गरीबी उन्मूलन पर बात करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि दशकों से संघर्ष कर रहे करोड़ों लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाया गया है और अब लक्ष्य यह है कि वे दोबारा गरीबी में न लौटें। उन्होंने ‘पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना’ को विश्व की सबसे बड़ी योजना बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से 140 करोड़ की आबादी में किसी को भी भूखा न रहने देने का संकल्प पूरा किया जा रहा है, जिससे 81 करोड़ से अधिक लोग लाभान्वित हो रहे हैं।
इसके अलावा, गरीब परिवारों के लिए बिजली, पानी और शौचालय की सुविधाओं से युक्त चार करोड़ से अधिक पक्के घरों का निर्माण किया गया है। राष्ट्रपति ने इन प्रयासों को महात्मा गांधी के ‘सर्वोदय’ के आदर्शों का सजीव उदाहरण बताते हुए कहा कि ये योजनाएं गरीबों को गरिमापूर्ण जीवन और आगे बढ़ने का मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं।